“शिव परिवार की पहल – डर नहीं, अपनेपन और कर्तव्य के भाव से सीखें मराठी”

  • “शिव परिवार की पहल – डर नहीं, अपनेपन और कर्तव्य के भाव से सीखें मराठी”

ठाणे : महाराष्ट्र, जिसे देश की व्यापारी नगरी और कर्मभूमि के रूप में जाना जाता है, वहां की भाषा और संस्कृति का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के निर्णय का स्वागत करते हुए शिव परिवार ने एक सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल शुरू की है। शिव परिवार के संस्थापक एडवोकेट विनयकुमार सिंह ने इस मुहिम की शुरुआत करते हुए कहा कि यह पहल किसी दबाव या डर से नहीं, बल्कि अपनेपन और कर्तव्य की भावना से प्रेरित है। इसी सोच के साथ, शिव परिवार ने रिक्शा चालकों, हिंदी भाषी नागरिकों और आम लोगों के लिए “मराठी पाठशाला” की शुरुआत की है। इस पाठशाला का उद्देश्य केवल मराठी भाषा सिखाना नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की संस्कृति, सभ्यता और पर्यावरण के महत्व को भी समाज तक पहुंचाना है। संगठन का मानना है कि जब हम किसी स्थान को अपनी कर्मभूमि मानते हैं, तो वहां की भाषा और संस्कृति को अपनाना हमारा नैतिक दायित्व बन जाता है।

  • पाठशाला का समय: सोमवार से शुक्रवार, सुबह 8:30 बजे । 

इस पहल का सकारात्मक असर अब देखने को मिल रहा है। काफी लोग मराठी सीखकर इसका लाभ ले रहे हैं, जिससे उनके कामकाज, संवाद और स्थानीय लोगों के साथ संबंधों में सुधार हो रहा है। शिव परिवार ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी नकारात्मक विवाद में न पड़ें, बल्कि इस पहल को डर से नहीं, बल्कि अपनेपन और कर्तव्य के रूप में अपनाएं। साथ ही, संगठन ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से विनम्र निवेदन है कि इस विषय पर अत्यधिक सख्ती न बरती जाए। परमिट रद्द करने जैसे कठोर कदम उठाने के बजाय, रिक्शा चालकों और नागरिकों को मराठी सीखने के लिए उचित समय सीमा प्रदान की जाए तथा इस मुहिम को प्रशासन की ओर से भी सहयोग देकर और मजबूत बनाया जाए।संगठन का मानना है कि प्रशासन के सहयोग से यह पहल समाज में एकता, भाईचारा और सांस्कृतिक सम्मान को और मजबूत करेगी।