स्मार्ट सिटी सिर्फ कागजों पर! कल्याण में ट्रैफिक जाम, खस्ताहाल सड़कें और अतिक्रमण से जनता त्रस्त ।

  • स्मार्ट सिटी सिर्फ कागजों पर! कल्याण में ट्रैफिक जाम, खस्ताहाल सड़कें और अतिक्रमण से जनता त्रस्त ।
  • 2016 में हुआ था चयन, 2,032 करोड़ का प्रस्ताव, फिर भी बैल बाजार से पत्री पुल तक जाम जस का तस

डोंबिवली :  कल्याण को स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा हुए बरसों बीत गए, लेकिन जमीन पर हालात आज भी वैसे ही हैं। *स्मार्ट सिटी तो नहीं बना, लेकिन कल्याण जाम सिटी जरूर बन गया है। 20 सितंबर 2016 को केंद्र सरकार ने कल्याण-डोंबिवली को देश के 100 स्मार्ट शहरों की लिस्ट में चुना था। उस समय KDMC ने *2,032 करोड़ रुपये का प्रस्ताव* दिया था। इसके लिए Smart Kalyan Dombivli Development Corporation (SKDCL) नाम की अलग कंपनी (SPV) बनाई गई थी।
प्लान में था – कल्याण स्टेशन का पूरा विकास, सड़कें, पानी वितरण, सफाई, आधारवाडी डंपिंग ग्राउंड बंद करना, 24 किमी वॉटरफ्रंट, CCTV और कमांड कंट्रोल सेंटर। सरकारी आंकड़ों के अनुसार कुल 19 प्रोजेक्ट (1,245 करोड़) मंजूर हुए, जिनमें से 16 प्रोजेक्ट (721 करोड़) ही पूरे हुए। अभी भी 523 करोड़ के काम अधूरे पड़े हैं। और अब तो 22 अप्रैल 2026 को महाराष्ट्र सरकार ने SPV ही खत्म कर दिया है। अब सारी जिम्मेदारी *KDMC आयुक्त के पास आ गई है। यानी स्मार्ट सिटी मिशन आधिकारिक रूप से खत्म हो चुका है, लेकिन कल्याण की समस्या खत्म नहीं हुई। कल्याण का सबसे व्यस्त मार्ग बैल बाजार से पत्री पुल तक सुबह-शाम हमेशा जाम रहता है। 10 मिनट का रास्ता तय करने में 45 मिनट से एक घंटा लग जाता है। स्कूल, दफ्तर और एंबुलेंस तक इस जाम में फंस जाती है। जगह-जगह सड़कें टूटी हुई हैं और गड्ढों से भरी पड़ी हैं। जहां सड़क ठीक है, वहां अतिक्रमण ने कब्जा कर रखा है। फुटपाथ पर दुकानें सज गई हैं, तो पैदल चलने वालों को मजबूरी में सड़क पर चलना पड़ता है। कल्याण स्टेशन (पूर्व और पश्चिम) का परिसर पूरी तरह रिक्शा चालकों के कब्जे में है। बसों को रुकने की जगह नहीं मिलती, यात्रियों को चलने की जगह नहीं मिलती। मनमाना किराया और बीच सड़क पर रिक्शा खड़ी करके सवारी भरना आम बात हो गई है।
जनता की मांग:
1. कल्याण रिंग रोड: MMRDA ने 1,239 करोड़ के रिंग रोड के लिए 600 करोड़ मंजूर किए हैं। यही जाम का स्थायी उपाय है।
2. मेट्रो 5 (भिवंडी-कल्याण) और मेट्रो 14: जल्द शुरू हो तो स्टेशन का बोझ कम होगा।
3. संयुक्त अतिक्रमण अभियान: पालिका + ट्रैफिक पुलिस मिलकर बैल बाजार, पत्री पुल, शिवाजी चौक पर रोज कार्रवाई करे, सिर्फ एक दिन का फोटो सेशन नहीं।
4. रिक्शा स्टैंड व्यवस्थित हो: स्टेशन के बाहर अलग से तय स्टैंड, अवैध पार्किंग पर सख्त जुर्माना।
5. सड़कों की मरम्मत: KDMC बजट में सड़क मरम्मत के लिए सिर्फ 30 करोड़ है, इसे बढ़ाना होगा।
कल्याणकरों का सवाल साफ है – पैसा आया, कंपनी बनी, बोर्ड लगे, लेकिन जाम क्यों नहीं हटा? अब जब जिम्मेदारी सीधे आयुक्त के पास है, तो जनता को काम जमीन पर चाहिए, कागज पर नहीं।