कल्याण न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला वकील की बकाया फीस न्यायालयीन आदेश से वसूल; प्रतिवादी को ₹35 हजार और 6% ब्याज देने का आदेश

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    वकील की बकाया फीस न्यायालयीन आदेश से वसूल; प्रतिवादी को ₹35 हजार और 6% ब्याज देने का आदेश

कल्याण : कल्याण स्थित सह दिवानी न्यायाधीश, कनिष्ठ स्तर के न्यायालय ने वकील की बकाया व्यावसायिक फीस की वसूली के संबंध में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए वकील के पक्ष में दायर दावा आंशिक रूप से मंजूर किया है। यह फैसला नियमित दिवानी दावा क्र. 122/2024, एड. हरिष हरिदास नायर बनाम उमेश रमेश भोईर मामले में दिनांक 4 अगस्त 2026 को सुनाया गया। इस मामले में वादी एड. हरिष हरिदास नायर ने प्रतिवादी की ओर से कल्याण न्यायालय में चल रहे विवाह याचिका क्र. 678/2022 में अधिवक्ता के रूप में पैरवी की थी। उक्त कार्य के लिए ₹50,000/- अधिवक्ता फीस तय की गई थी। इसमें से प्रतिवादी ने ₹15,000/- का भुगतान किया था, जबकि ₹35,000/- फीस बकाया रह गई थी। बकाया राशि का बार-बार तकाजा करने के बावजूद प्रतिवादी द्वारा भुगतान नहीं किए जाने के कारण वादी ने वर्ष 2022 में दिवानी दावा दाखिल किया था। प्रतिवादी को न्यायालयीन समन की विधिवत तामील होने के बावजूद वह न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद मामले की सुनवाई एकतरफा (Ex Parte) की गई। वादी की ओर से प्रस्तुत मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने माना कि वादी ने अपना दावा सिद्ध किया है। न्यायालय ने अपने निष्कर्ष में माना कि वादी और प्रतिवादी के बीच अधिवक्ता फीस के रूप में ₹50,000/- तय हुई थी, जिसमें से ₹15,000/- प्राप्त हुए तथा ₹35,000/- की राशि बकाया थी। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि वादी का साक्ष्य प्रतिपरीक्षण के अभाव में अप्रतिवादित (Unchallenged) रहा। हालांकि, वादी द्वारा मांगे गए 18% ब्याज के बजाय न्यायालय ने दावा दाखिल करने की तारीख से वास्तविक वसूली तक 6% वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया।
न्यायालय का अंतिम आदेश : न्यायालय ने आदेश दिया कि प्रतिवादी ₹35,000/- की बकाया राशि, दावा दाखिल करने की तारीख से 6% वार्षिक ब्याज सहित, आदेश की तारीख से एक महीने के भीतर वादी को अदा करे। साथ ही दावा खर्च सहित आंशिक रूप से मंजूर किया गया है।
यह फैसला वकीलों की व्यावसायिक फीस की कानूनी वसूली के संबंध में कल्याण न्यायालय का महत्वपूर्ण एवं चर्चा का विषय बनने वाला फैसला माना जा रहा है।
फीस न देने वाले क्लाइंट के लिए महत्वपूर्ण संदेश
जिन क्लाइंटों के लिए वकील न्यायालय या अन्य प्राधिकरणों के समक्ष पूरी मेहनत, गहन अध्ययन और समर्पण के साथ उनके मामलों की पैरवी करते हैं, उन्हीं क्लाइंटों के विरुद्ध बाद में अपनी मेहनत की फीस वसूलने के लिए स्वयं मुकदमा लड़ने की स्थिति में आने वाले वकीलों के उदाहरण भी सामने आते हैं। यह मामला इसी तरह की एक विचित्र परिस्थिति को दर्शाता है।
वकील वर्ग का मानना है कि वकीलों की मेहनत और व्यावसायिक फीस का भुगतान न करने वाले क्लाइंटों के लिए यह फैसला एक कड़ा संदेश और बड़ी चपत है। साथ ही यह निर्णय इस बात को रेखांकित करता है कि अधिवक्ता द्वारा प्रदान की गई पेशेवर सेवाओं की उचित फीस का भुगतान करना भी क्लाइंट की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।