थैला बैंक याद है…प्लास्टिक मुक्त शहर के लिए एक आशा की किरण

विनय दूबे @ हिन्द सागर
मीरा-भाईंदर: मीरा-भाईंदर मनपा के सहयोग और स्थानीय एनजीओ व सामाजिक संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी से थैला बैंक का पुनरारम्भ जल्द ही होने जा रहा है। जून 2025 में बड़े उत्साह के साथ शुरू हुआ यह अभियान कुछ समय के बाद फंड की कमी के कारण ठहर गया था, पर अब आयुक्त राधाबिनोद शर्मा और पर्यावरण विभाग के सभापति मधुसूदन पुरोहित के संयुक्त प्रयासों से थैला बैंक 2.0 फिर जीवन में लौट रहा है।

एक तरफ सरकार प्लास्टिक पर बैन लगा रही है, तो दूसरी तरफ मनपा विकल्प भी दे रही है। थैला बैंक का उद्देश्य सरल और प्रासंगिक है —पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक लाभ का संगम। प्लास्टिक के उपयोग को घटाकर पुन:प्रयुक्त, सुदृढ़ और पर्यावरण-अनुकूल थैलियों के माध्यम से नागरिकों को सहायता देना।थैला बैंक 2.0 सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त मीरा-भाईंदर का संकल्प है। थैला बैंक 2.0 के शीघ्र शुभारम्भ से उम्मीद जगी है कि मीरा-भाईंदर शहर एक उदाहरण बनेगा — जहाँ पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय साथ-साथ चलते हैं। छोटे-छोटे कदम मिलकर बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं; बस जरूरत है जनभागीदारी और दृढ़ इच्छा की।

ज्ञात हो कि प्रथम चरण में मेकिंग द डिफरेंस और पँखी फाउंडेशन के सहयोग से एमबीएमसी के छह आर.आर. सेंटरों में जमा किए गए पुराने कपड़ों को जुटाकर कुल आठ हजार थैले तैयार किए गए थे। सिलाई का काम स्थानीय संस्था संस्कृति संवर्धन सेवा भावी को सौंंपकर आत्म-निर्भर महिलाओं को रोजगार भी उपलब्ध कराया गया था। ये थैले मंगल नगर, रामदेव पार्क, सब्जी मंडी, स्लम क्षेत्रों और शहर के अन्य हिस्सों में वितरित किए गए। साथ में प्लास्टिक मुक्त विकल्प अपनाने के जागरूकता अभियान भी चलाए गए थे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार एक थैली की कीमत 50 रूपये निर्धारित की गई थी पर नागरिकों के ठन्डे प्रतिसाद को देख पूरी थैलियों का निःशुल्क वितरण करने के बाद अभियान बंद कर दिया गया था।

उपायुक्त सचिन बांगर ने कहा, “प्लास्टिक पर्यावरण के लिए अभिशाप है — प्रशासन तथा नागरिक दोनों के सहयोग से ही यह अभियान सफल हो सकता है।”थैला बैंक 2.0 केवल थैली बाँटने का कार्यक्रम नहीं है — यह एक संदेश है: छोटा बदलाव बड़ा प्रभाव लाता है। पुराने कपड़ों को नज़रअंदाज़ न करें; उन्हें पुनरुपयोग में लाकर न सिर्फ कचरा घटेगा, बल्कि स्थानीय महिला स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।

पर्यावरण विभाग के सभापति मधुसूदन पुरोहित ने भी जोर देकर कहा कि पर्यावरण संरक्षण हमारी नैतिक जिम्मेदारी है; प्रशासन दिशा-निर्देश दे सकता है, पर असली क्रियान्वयन नागरिकों के हाथ में है।जब हर नागरिक अपने स्तर पर प्लास्टिक-प्रयोग घटाएगा, तभी हमारा शहर सचमुच प्लास्टिक मुक्त बन सकेगा।