मीरा-भाईंदर मनपा के फैसले से शिक्षा क्षेत्र में हलचल
चतुर्भुजा पाण्डेय @ हिन्द सागर
मीरा-भाईंदर: मीरा-भाईंदर महानगरपालिका द्वारा नए कर निर्धारण को लेकर लिया गया फैसला शहर में चर्चा का विषय बन गया है। महानगरपालिका ने जहां शैक्षणिक संस्थानों पर संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) बढ़ाने का निर्णय लिया है, वहीं होटल, लॉजिंग और बोर्डिंग व्यवसायों को इस कर वृद्धि से बाहर रखा गया है। इस निर्णय से शिक्षा क्षेत्र से जुड़े संचालकों में असंतोष देखा जा रहा है। आश्चर्य की बात है कि जहां शिक्षा मिलना है वहां पर कर लगाकर शैक्षणिक संस्थाओं के लिए बाधा उत्पन्न रहे हैं, जहां से फिजूलखर्ची व समाज में अवैध गतिविधियां चलती हैं उसको बढ़ावा दिया जा रहा है।
महानगरपालिका के नए प्रस्ताव के अनुसार, शहर में संचालित नए और मौजूदा स्कूलों, कॉलेजों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों पर कर की दरों में वृद्धि की जाएगी। अधिकारियों का तर्क है कि शैक्षणिक संस्थानों का व्यावसायिक उपयोग बढ़ा है, इसलिए कर संरचना में बदलाव आवश्यक था।
हालांकि, शिक्षा क्षेत्र का कहना है कि इस निर्णय का सीधा असर छात्रों और अभिभावकों पर पड़ेगा, क्योंकि बढ़ा हुआ कर अंततः शुल्क वृद्धि के रूप में वसूला जा सकता है। निजी स्कूल संचालकों का आरोप है कि प्रशासन एक ओर शिक्षा को सुलभ बनाने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर कर बढ़ाकर दबाव बना रहा है।
वहीं दूसरी तरफ, होटल, लॉजिंग-बोर्डिगं और बार जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को कर वृद्धि से राहत दी गई है। इसे लेकर सामाजिक संगठनों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जिन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ होता है, उन्हें राहत दी जा रही है, जबकि समाज निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले शैक्षणिक संस्थानों पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।
महानगरपालिका प्रशासन का दावा है कि यह फैसला नए विकास कार्यों और राजस्व संतुलन को ध्यान में रखकर लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, कर निर्धारण पूरी तरह नियमों और वर्गीकरण के आधार पर किया गया है।
इस फैसले के बाद शहर में शिक्षा संस्थानों के संघों द्वारा विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने की तैयारी चल रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस और तेज होने की संभावना है।